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प्रश्नावली 9.2 के हल

कक्षा 9 गणित · अध्याय 9: वृत्त · 6 प्रश्न

प्र. 1प्र. 2प्र. 3प्र. 4प्र. 5प्र. 6
प्रश्न 1

5 cm तथा 3 cm त्रिज्या वाले दो वृत्त दो बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करते हैं तथा उनके केन्द्रों के बीच की दूरी 4 cm है। उभयनिष्ठ जीवा की लम्बाई ज्ञात कीजिए।

ज्ञात है
बड़ा वृत्त: केन्द्र O, त्रिज्या
छोटा वृत्त: केन्द्र O′, त्रिज्या
केन्द्रों के बीच की दूरी
वृत्त A और B पर प्रतिच्छेद करते हैं; AB उभयनिष्ठ जीवा है, जो OO′ को M पर काटती है
ज्ञात करना है
उभयनिष्ठ जीवा की लम्बाई
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
x53OO′MAB
हल की आकृति (1 cm = 25 px): 5 cm त्रिज्याएँ लाल, 3 cm त्रिज्याएँ नीली, केन्द्र-रेखा OO′ हरी, उभयनिष्ठ जीवा नारंगी
OA = OB = 5 cmO′A = O′B = 3 cmOO′ = 4 cm, OM = xAM = MB∠AMO = 90°
चरण 1: OO′ जीवा AB को समकोण पर समद्विभाजित करती है
(1) प्रमेय 7.4 (SSS सर्वांगसमता नियम): यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ एक अन्य त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
और में,
कथनकारण
भुजाबड़े वृत्त की त्रिज्याएँ (5 cm)
भुजाछोटे वृत्त की त्रिज्याएँ (3 cm)
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
SSS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
कथनकारण
CPCT (∠AOO′ ↔ ∠BOO′; M रेखा OO′ पर है)
(2) अभिगृहीत 7.1 (SAS सर्वांगसमता नियम): दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।
और में,
कथनकारण
भुजात्रिज्याएँ
कोण(1) से
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(3) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT
CPCT
(4) रैखिक युग्म अभिगृहीत (अभिगृहीत 6.1): यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग होता है।
(AMB एक रेखा है (रैखिक युग्म))((3) से ∠BMO = ∠AMO रखने पर)(∠AMO + ∠AMO = 2∠AMO)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(180 ÷ 2 = 90)

अतः और दोनों में M पर समकोण है।

चरण 2: OM = x मानकर समीकरण बनाना

माना । तब

(M, रेखाखंड OO′ पर है)(OO′ = 4 cm, OM = x रखने पर)
(5) पाइथागोरस प्रमेय: समकोण त्रिभुज में, (कर्ण)² = (आधार)² + (लम्ब)²

में (कर्ण OA):

(पाइथागोरस प्रमेय)(OA = 5, OM = x रखने पर)
(x² को पक्षांतर करने पर (+ → −))(5² = 5 × 5 = 25)

में (कर्ण O′A):

(पाइथागोरस प्रमेय)(O′A = 3, O′M = 4 − x रखने पर)
((4 − x)² को पक्षांतर करने पर (+ → −))(3² = 3 × 3 = 9)
चरण 3: x का मान
(6) सर्वसमिका:
((4) और (5) दोनों AM² के बराबर हैं)(सर्वसमिका (a − b)² में a = 4, b = x)(4² = 16, 2 × 4 × x = 8x)(कोष्ठक हटाने पर, अंदर के चिह्न बदलते हैं)(9 − 16 = −7)
(दोनों पक्षों में x² जोड़ने पर (−x² का पक्षांतर))(−x² + x² = 0)
(−7 को पक्षांतर करने पर +7)(25 + 7 = 32)
(8 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(32 ÷ 8 = 4)
अर्थात् OM = 4 cm = OO′, यानी M और O′ एक ही बिंदु हैं: उभयनिष्ठ जीवा छोटे वृत्त के केन्द्र O′ से होकर जाती है (O′M = 4 − 4 = 0)।
चरण 4: AM और AB
((4) से)(x = 4 रखने पर)(4² = 4 × 4 = 16)(25 − 16 = 9)
(दोनों पक्षों का वर्गमूल)(9 के अभाज्य गुणनखंड: 9 = 3 × 3)(3 का एक जोड़ा √ से बाहर 3 आता है)
(7) प्रमेय 9.3: एक वृत्त के केन्द्र से एक जीवा पर डाला गया लम्ब जीवा को समद्विभाजित करता है।
(M, AB पर है)((2) से MB = AM)(AM + AM = 2AM)(AM = 3 रखने पर)(2 × 3 = 6)
उत्तर: उभयनिष्ठ जीवा की लम्बाई है।
प्रश्न 2

यदि एक वृत्त की दो समान जीवाएँ वृत्त के अन्दर प्रतिच्छेद करें, तो सिद्ध कीजिए कि एक जीवा के खंड दूसरी जीवा के संगत खंडों के बराबर हैं।

ज्ञात है
केन्द्र O वाले वृत्त की दो बराबर जीवाएँ:
AB और CD वृत्त के अंदर बिंदु E पर प्रतिच्छेद करती हैं
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है: और
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
ABCDOEMN
हल की आकृति: OM ⊥ AB, ON ⊥ CD (लाल); AM = CN नीले, ME = NE नारंगी, EB = ED हरे-नीले

रचना: O से और खींचिए; OE को मिलाइए।

OM = ONOE (उभयनिष्ठ)ME = NEAM = CNEB = EDसमकोण
(1) प्रमेय 9.5: एक वृत्त की (या सर्वांगसम वृत्तों की) बराबर जीवाएँ केन्द्र से (या केन्द्रों से) समान दूरी पर होती हैं।
जीवाएँ AB और CD बराबर हैं, इसलिए
कथनकारण
प्रमेय 9.5 (बराबर जीवाएँ केन्द्र से समान दूरी पर)
(2) प्रमेय 7.5 (RHS सर्वांगसमता नियम): यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा क्रमशः दूसरे त्रिभुज के कर्ण और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
और में,
कथनकारण
समकोणरचना से (OM ⊥ AB, ON ⊥ CD)
कर्णउभयनिष्ठ कर्ण
भुजा(1) से
RHS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(3) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (M ↔ N)
(4) प्रमेय 9.3: एक वृत्त के केन्द्र से एक जीवा पर डाला गया लम्ब जीवा को समद्विभाजित करता है।
(प्रमेय 9.3: OM ⊥ AB, इसलिए M, AB का मध्य-बिंदु है)(AB = CD (दिया है))(प्रमेय 9.3: ON ⊥ CD, इसलिए N, CD का मध्य-बिंदु है)
एक जीवा के खंड = दूसरी के संगत खंड
(M, A और E के बीच है)((3) और (2) से)(N, C और E के बीच है)
(E, AB पर है)(AB = CD (दिया है) और (4) से AE = CE)(E, CD पर है)
उत्तर:
(i)
(ii) — अर्थात् एक जीवा के खंड दूसरी जीवा के संगत खंडों के बराबर हैं। सिद्ध हुआ।
प्रश्न 3

यदि एक वृत्त की दो समान जीवाएँ वृत्त के अन्दर प्रतिच्छेद करें, तो सिद्ध कीजिए कि प्रतिच्छेद बिन्दु को केन्द्र से मिलाने वाली रेखा जीवाओं से बराबर कोण बनाती है।

ज्ञात है
केन्द्र O वाले वृत्त की दो बराबर जीवाएँ:
AB और CD वृत्त के अंदर बिंदु E पर प्रतिच्छेद करती हैं; OE को मिलाया गया
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है: OE जीवाओं से बराबर कोण बनाती है:
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
ABCDOEMN
हल की आकृति: OM ⊥ AB, ON ⊥ CD (लाल); OE हरी; OE द्वारा जीवाओं से बने कोण भूरे

रचना: O से और खींचिए; OE को मिलाइए।

OM = ONOE (उभयनिष्ठ)∠OEM, ∠OENसमकोण
(1) प्रमेय 9.5: एक वृत्त की (या सर्वांगसम वृत्तों की) बराबर जीवाएँ केन्द्र से (या केन्द्रों से) समान दूरी पर होती हैं।
जीवाएँ AB और CD बराबर हैं, इसलिए
कथनकारण
प्रमेय 9.5 (बराबर जीवाएँ केन्द्र से समान दूरी पर)
(2) प्रमेय 7.5 (RHS सर्वांगसमता नियम): यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा क्रमशः दूसरे त्रिभुज के कर्ण और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
और में,
कथनकारण
समकोणरचना से (OM ⊥ AB, ON ⊥ CD)
कर्णउभयनिष्ठ कर्ण
भुजा(1) से
RHS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(3) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (M ↔ N)

M, रेखाखंड EA पर है और N, रेखाखंड EC पर है, इसलिए और ।

(M, EA पर है)((2) से)(N, EC पर है)
उत्तर: प्रतिच्छेद बिंदु E को केन्द्र O से मिलाने वाली रेखा OE दोनों जीवाओं से बराबर कोण बनाती है: । सिद्ध हुआ।
प्रश्न 4

यदि एक रेखा दो संकेन्द्री वृत्तों (एक ही केन्द्र वाले वृत्त) को, जिनका केन्द्र O है, A, B, C और D पर प्रतिच्छेद करे, तो सिद्ध कीजिए है (देखिए आकृति 9.12)।

ज्ञात है
संकेन्द्री वृत्त, केन्द्र O
एक रेखा बड़े वृत्त को A और D पर तथा छोटे वृत्त को B और C पर काटती है
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
ABCDO
आकृति 9.12
ABCDOM
हल की आकृति: OM ⊥ AD (लाल), BM = MC नीले, AB और CD हरे

रचना: O से रेखा पर खींचिए।

OM ⊥ ADBM = MCAB, CDसमकोण
(1) प्रमेय 9.3: एक वृत्त के केन्द्र से एक जीवा पर डाला गया लम्ब जीवा को समद्विभाजित करता है।
(बड़े वृत्त की जीवा AD पर केन्द्र से लम्ब OM (प्रमेय 9.3))
(छोटे वृत्त की जीवा BC पर केन्द्र से लम्ब OM (प्रमेय 9.3))
(B, A और M के बीच है)((1) और (2) से)(C, M और D के बीच है)
उत्तर: । सिद्ध हुआ।
प्रश्न 5

एक पार्क में बने 5 m त्रिज्या वाले वृत्त पर खड़ी तीन लड़कियाँ रेशमा, सलमा एवं मनदीप खेल रही हैं। रेशमा एक गेंद को सलमा के पास, सलमा मनदीप के पास तथा मनदीप रेशमा के पास फेंकती है। यदि रेशमा तथा सलमा के बीच और सलमा तथा मनदीप के बीच की प्रत्येक दूरी 6 m हो, तो रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी क्या है?

ज्ञात है
वृत्त का केन्द्र O, त्रिज्या
R = रेशमा, S = सलमा, M = मनदीप (वृत्त पर)
ज्ञात करना है
रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
xRSMOL
हल की आकृति (1 m = 26 px): त्रिज्याएँ लाल, RS = SM नारंगी, OL = x बैंगनी, RL = LM नीले

रचना: O और S को मिलाइए; OS, जीवा RM को L पर काटती है।

OR = OM = 5 mRS = SM = 6 m∠ROL = ∠MOLOL = x, समकोणLS = 5 − xRL = LM = y
चरण 1: OS, जीवा RM को समकोण पर समद्विभाजित करती है
(1) प्रमेय 7.4 (SSS सर्वांगसमता नियम): यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ एक अन्य त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
और में,
कथनकारण
भुजात्रिज्याएँ (5 m)
भुजादिया है (6 m)
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
SSS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
कथनकारण
CPCT (∠ROS ↔ ∠MOS; L रेखा OS पर है)
(2) अभिगृहीत 7.1 (SAS सर्वांगसमता नियम): दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।
और में,
कथनकारण
भुजात्रिज्याएँ
कोण(1) से
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(3) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT
CPCT
(4) रैखिक युग्म अभिगृहीत (अभिगृहीत 6.1): यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग होता है।
(RLM एक रेखा है (रैखिक युग्म))((3) से ∠MLO = ∠RLO रखने पर)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(180 ÷ 2 = 90)
चरण 2: OL = x और RL = y मानकर समीकरण

माना और । तब

(L, रेखाखंड OS पर है)(OS = 5, OL = x रखने पर)
(5) पाइथागोरस प्रमेय: समकोण त्रिभुज में, (कर्ण)² = (आधार)² + (लम्ब)²

समकोण में (कर्ण OR):

(पाइथागोरस प्रमेय)(मान रखने पर)
(5² = 5 × 5 = 25 (पक्ष बदलकर लिखा))

समकोण में (कर्ण RS):

(6) सर्वसमिका:
(पाइथागोरस प्रमेय)(मान रखने पर)(6² = 36; सर्वसमिका (a − b)² में a = 5, b = x)(5² = 25, 2 × 5 × x = 10x)(x² + y² को साथ रखने पर)((4) से x² + y² = 25 रखने पर)(25 + 25 = 50)
चरण 3: x का मान
(36 = 50 − 10x में −10x को पक्षांतर करने पर (− → +))
(36 को पक्षांतर करने पर (+ → −))(50 − 36 = 14)
(10 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(14 ÷ 10 = 1.4)
चरण 4: y का मान
((4) से x² का पक्षांतर करने पर)(x = 1.4 रखने पर)(1.4 × 1.4 = 1.96)(25.00 − 1.96 = 23.04)
(दोनों पक्षों का वर्गमूल)(23.04 = 2304 ÷ 100)(अभाज्य गुणनखंड: 2304 = 2⁸ × 3², 100 = 2² × 5²)(हर जोड़े में से एक संख्या √ से बाहर: ऊपर 2 के 4 जोड़े, 3 का 1 जोड़ा; नीचे 2 और 5 का 1-1 जोड़ा)(2 × 2 × 2 × 2 × 3 = 48, 2 × 5 = 10)(48 ÷ 10 = 4.8)
चरण 5: रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी
(L, RM पर है)((2) से LM = RL = y)(y + y = 2y)(y = 4.8 रखने पर)(2 × 4.8 = 9.6)
उत्तर: रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी है।
प्रश्न 6

20 m त्रिज्या का एक गोल पार्क (वृत्ताकार) एक कालोनी में स्थित है। तीन लड़के अंकुर, सैय्यद तथा डेविड इसकी परिसीमा पर बराबर दूरी पर बैठे हैं और प्रत्येक के हाथ में एक खिलौना टेलीफोन आपस में बात करने के लिए है। प्रत्येक फोन की डोरी की लम्बाई ज्ञात कीजिए।

ज्ञात है
वृत्ताकार पार्क: केन्द्र O, त्रिज्या
A = अंकुर, S = सैय्यद, D = डेविड (परिसीमा पर, बराबर दूरी पर)
ज्ञात करना है
प्रत्येक फोन की डोरी की लम्बाई
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
ASDKOL
हल की आकृति: बराबर डोरियाँ नारंगी, त्रिज्याएँ लाल, OL ⊥ AS; OL को बढ़ाने पर वह वृत्त को K पर मिलती है

रचना: O से खींचिए और OL को बढ़ाइए, जो वृत्त को K पर मिले। AK को मिलाइए।

AS = SD = DAत्रिज्याएँ OA = OK = AK∠AOL = ∠SOLOL = LKसमकोण
चरण 1:
(1) प्रमेय 9.1: वृत्त की बराबर जीवाएँ केन्द्र पर बराबर कोण अंतरित करती हैं।
(AS = SD, बराबर जीवाएँ (प्रमेय 9.1))(SD = DA, बराबर जीवाएँ (प्रमेय 9.1))
(O के चारों ओर पूरा कोण)((1) से रखने पर)(तीन बार जोड़ = 3 गुना)
(3 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(360 ÷ 3 = 120)
चरण 2:
(2) प्रमेय 7.5 (RHS सर्वांगसमता नियम): यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा क्रमशः दूसरे त्रिभुज के कर्ण और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
और में,
कथनकारण
समकोणरचना से (OL ⊥ AS)
कर्णत्रिज्याएँ (कर्ण)
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
RHS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
कथनकारण
CPCT
CPCT (यह प्रमेय 9.3 से भी मिलता है)
(OL, ∠AOS के अंदर है)((2) से और चरण 1 से)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(120 ÷ 2 = 60)
चरण 3: समबाहु है, अतः
(3) प्रमेय 7.2: एक समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
(OA = OK (त्रिज्याएँ), इनके सम्मुख कोण (प्रमेय 7.2))
(4) त्रिभुज के कोणों का योग गुण: त्रिभुज के तीनों कोणों का योग होता है।
(त्रिभुज AOK के कोणों का योग)((4) से, और ∠AOK = ∠AOL = 60°)(∠OAK + ∠OAK = 2∠OAK)
(60° को पक्षांतर करने पर (+ → −))(180 − 60 = 120)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(120 ÷ 2 = 60)
(5) प्रमेय 7.3: किसी त्रिभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।

(चरण 2 और (4) से), इसलिए इनकी सम्मुख भुजाएँ बराबर हैं:

(∠AOK के सामने AK, ∠OKA के सामने OA (प्रमेय 7.3))(त्रिज्या)
चरण 4:
और में,
कथनकारण
समकोणरचना से (AL ⊥ OK)
कर्णदोनों 20 m (चरण 3)
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
RHS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
कथनकारण
CPCT
(L, OK पर है)((5) से, और OK = 20 m (त्रिज्या))(OL + OL = 2OL)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(20 ÷ 2 = 10)
चरण 5: AL और डोरी AS
(6) पाइथागोरस प्रमेय: समकोण त्रिभुज में, (कर्ण)² = (आधार)² + (लम्ब)²
(समकोण △OLA में पाइथागोरस प्रमेय (कर्ण OA))(मान रखने पर)(20 × 20 = 400, 10 × 10 = 100)
(100 को पक्षांतर करने पर (+ → −))(400 − 100 = 300)
(दोनों पक्षों का वर्गमूल)(300 के अभाज्य गुणनखंड: 300 = 2 × 2 × 3 × 5 × 5)(2 का एक जोड़ा और 5 का एक जोड़ा √ से बाहर; 3 अंदर रहता है)(2 × 5 = 10)
(L, AS पर है)((3) से LS = AL)(AL + AL = 2AL)(2 × 10 = 20)(√3 ≈ 1.732 रखने पर)(20 × 1.732 = 34.64 (लगभग))
उत्तर: प्रत्येक फोन की डोरी की लम्बाई है (लगभग )।
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यह हल MP Board (MPBSE) कक्षा 9 गणित की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 9 ‘वृत्त’ के अनुसार है।