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प्रश्नावली 8.1 के हल

कक्षा 9 गणित · अध्याय 8: चतुर्भुज · 7 प्रश्न

प्र. 1प्र. 2प्र. 3प्र. 4प्र. 5प्र. 6प्र. 7
प्रश्न 1

यदि एक समांतर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों, तो दर्शाइए कि वह एक आयत है।

ज्ञात है
ABCD एक समांतर चतुर्भुज है: ,
विकर्ण
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है: ABCD एक आयत है (अर्थात् इसका एक कोण है)
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
ABCD
हल की आकृति: AB = DC लाल, BC हरी (उभयनिष्ठ), बराबर विकर्ण नारंगी
AB = DCBC उभयनिष्ठAC = DB (विकर्ण)∠ABC, ∠DCB
(1) प्रमेय 8.2: एक समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
(2) प्रमेय 7.4 (SSS सर्वांगसमता नियम): यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ एक अन्य त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
और में,
कथनकारण
भुजासमांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ (प्रमेय 8.2)
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
भुजादिया है (विकर्ण बराबर हैं)
(1), (2), (3) से, SSS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(3) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (शीर्ष B ↔ C)
(4) तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता है (योग )।
(AB ∥ DC, तिर्यक रेखा BC — एक ही ओर के अंतः कोण)((4) से ∠DCB = ∠ABC रखने पर)(∠ABC + ∠ABC = 2∠ABC)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(180 ÷ 2 = 90)
(5) आयत: आयत वह समांतर चतुर्भुज है जिसका एक कोण समकोण हो।

समांतर चतुर्भुज ABCD का एक कोण है, इसलिए ABCD एक आयत है।

उत्तर: समांतर चतुर्भुज ABCD में , अतः ABCD एक आयत है। सिद्ध हुआ।
प्रश्न 2

दर्शाइए कि एक वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं और परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।

ज्ञात है
ABCD एक वर्ग है:
प्रत्येक कोण
विकर्ण AC और BD, बिंदु O पर मिलते हैं
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
(i)
(ii) और
(iii)
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
ABCDO
हल की आकृति: चारों भुजाएँ लाल (बराबर), OA = OC नीले, OB = OD नारंगी
वर्ग की भुजाएँ∠ABC = ∠BAD = 90°OA = OCOB = OD∠AOB, ∠AOD
(i) विकर्ण बराबर हैं:
(1) अभिगृहीत 7.1 (SAS सर्वांगसमता नियम): दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।
और में,
कथनकारण
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
कोणवर्ग का प्रत्येक कोण 90° है
भुजावर्ग की सभी भुजाएँ बराबर हैं
(1), (2), (3) से, SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(2) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (A ↔ B, C ↔ D, इसलिए AC ↔ BD)
(ii) विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं
(3) प्रमेय 8.6: समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को (परस्पर) समद्विभाजित करते हैं।
वर्ग एक समांतर चतुर्भुज है, इसलिए
कथनकारण
प्रमेय 8.6
प्रमेय 8.6
(iii) विकर्ण समकोण पर मिलते हैं
और में,
कथनकारण
भुजा(5) से
भुजावर्ग की भुजाएँ
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
SSS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(4) प्रमेय 7.4 (SSS सर्वांगसमता नियम): यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ एक अन्य त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
कथनकारण
CPCT (B ↔ D)
(5) रैखिक युग्म अभिगृहीत (अभिगृहीत 6.1): यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग होता है।
(किरण OA रेखा BD पर खड़ी है (रैखिक युग्म))((6) से ∠AOD = ∠AOB रखने पर)(∠AOB + ∠AOB = 2∠AOB)
(2 को पक्षांतर करने पर (गुणा → भाग))(180 ÷ 2 = 90)
उत्तर:
(i) (विकर्ण बराबर हैं)
(ii) और (विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं)
(iii) (विकर्ण समकोण पर मिलते हैं) — सिद्ध हुआ।
प्रश्न 3

समांतर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण AC कोण A को समद्विभाजित करता है (देखिए आकृति 8.11)। दर्शाइए कि(i) यह को भी समद्विभाजित करता है।(ii) ABCD एक समचतुर्भुज है।

ज्ञात है
ABCD एक समांतर चतुर्भुज है: ,
AC, ∠A को समद्विभाजित करता है:
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
(i) AC, ∠C को समद्विभाजित करता है:
(ii) ABCD एक समचतुर्भुज है
ABCD
आकृति 8.11
ABCD
हल की आकृति: एकांतर कोणों के युग्म नीले और नारंगी, विकर्ण AC हरा
∠BAC = ∠DCA (एकांतर)∠DAC = ∠BCA (एकांतर)विकर्ण ACभुजाएँ (सिद्ध करना है कि बराबर हैं)
(i) AC, ∠C को समद्विभाजित करता है
(1) एकांतर अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
(AB ∥ DC, तिर्यक रेखा AC — एकांतर कोण)
(AD ∥ BC, तिर्यक रेखा AC — एकांतर कोण)
(दिया है (AC, ∠A को समद्विभाजित करता है))
((1) से)((3) से)((2) से)

अतः , अर्थात् AC कोण C को भी समद्विभाजित करता है।

(ii) ABCD एक समचतुर्भुज है
((3) से)((1) से)
(2) प्रमेय 7.3: किसी त्रिभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
में,
कथनकारण
(4) से
बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ: ∠DAC के सामने DC, ∠DCA के सामने DA
(3) प्रमेय 8.2: एक समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
(समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ)((5) से)(समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ)
(4) समचतुर्भुज: वह समांतर चतुर्भुज जिसकी सभी भुजाएँ बराबर हों, समचतुर्भुज कहलाता है।

समांतर चतुर्भुज ABCD की चारों भुजाएँ बराबर हैं, इसलिए ABCD एक समचतुर्भुज है।

उत्तर:
(i) , अर्थात् AC कोण C को भी समद्विभाजित करता है
(ii) , अतः ABCD एक समचतुर्भुज है।
प्रश्न 4

ABCD एक आयत है जिसमें विकर्ण AC दोनों कोणों A और C को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि(i) ABCD एक वर्ग है(ii) विकर्ण BD दोनों कोणों B और D को समद्विभाजित करता है।

ज्ञात है
ABCD एक आयत है (प्रत्येक कोण )
AC, ∠A और ∠C को समद्विभाजित करता है:
और
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
(i) ABCD एक वर्ग है
(ii) BD, ∠B और ∠D को समद्विभाजित करता है
(पुस्तक में इस प्रश्न की आकृति नहीं दी है; नीचे हल के लिए आकृति बनाई गई है।)
ABCD
हल की आकृति: AC से बने आधे कोण नीले, BD से बने आधे कोण नारंगी, समकोण बैंगनी
AC से बने कोणBD से बने कोणभुजाएँसमकोण
(i) ABCD एक वर्ग है
(1) एकांतर अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
(AB ∥ DC, तिर्यक रेखा AC — एकांतर कोण)
(दिया है (AC, ∠A को समद्विभाजित करता है))
((1) से)((2) से)
(2) प्रमेय 7.3: किसी त्रिभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
में,
कथनकारण
(3) से
बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ: ∠DCA के सामने DA, ∠DAC के सामने DC
(3) प्रमेय 8.2: एक समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
(आयत की सम्मुख भुजाएँ)((4) से)(आयत की सम्मुख भुजाएँ)
(4) वर्ग: वह समांतर चतुर्भुज जिसका एक कोण समकोण हो और सभी भुजाएँ बराबर हों, वर्ग कहलाता है।

ABCD एक समांतर चतुर्भुज (आयत) है, इसका है और चारों भुजाएँ बराबर हैं, इसलिए ABCD एक वर्ग है।

(ii) BD, ∠B और ∠D को समद्विभाजित करता है
(5) प्रमेय 7.2: एक समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
में,
कथनकारण
(i) से (वर्ग की भुजाएँ)
बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण: CD के सामने ∠CBD, CB के सामने ∠CDB
(6) एकांतर अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
(AB ∥ DC, तिर्यक रेखा BD — एकांतर कोण)
((5) से)((6) से)

अतः , अर्थात् BD कोण B को समद्विभाजित करता है।

में,
कथनकारण
(i) से (वर्ग की भुजाएँ)
बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण: AB के सामने ∠ADB, AD के सामने ∠ABD
((7) से)((6) से)

अतः , अर्थात् BD कोण D को भी समद्विभाजित करता है।

उत्तर:
(i) ABCD का और , अतः ABCD एक वर्ग है
(ii) और , अर्थात् BD कोणों B और D को समद्विभाजित करता है।
प्रश्न 5

समांतर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण BD पर दो बिंदु P और Q इस प्रकार स्थित हैं कि है (देखिए आकृति 8.12)। दर्शाइए कि(i) (ii) (iii) (iv) (v) APCQ एक समांतर चतुर्भुज है।

ज्ञात है
ABCD एक समांतर चतुर्भुज है
P और Q विकर्ण BD पर हैं:
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
(i)
(ii)
(iii)
(iv)
(v) APCQ एक समांतर चतुर्भुज है
ADBCPQ
आकृति 8.12
ADBCPQ
हल की आकृति: AD = CB लाल, DP = BQ नारंगी, AB = CD हरे-नीले; एकांतर कोण नीले और बैंगनी
AD = CBDP = BQ∠ADP = ∠CBQAB = CD∠ABQ = ∠CDPAP, CQAQ, CP
(i)
(1) प्रमेय 8.2: एक समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
(2) एकांतर अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
(3) अभिगृहीत 7.1 (SAS सर्वांगसमता नियम): दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।
और में,
कथनकारण
भुजासमांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ (प्रमेय 8.2)
कोणAD ∥ BC, तिर्यक रेखा BD — एकांतर कोण
भुजादिया है
(1), (2), (3) से, SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(ii)
(4) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (A ↔ C, P ↔ Q)
(iii)
और में,
कथनकारण
भुजासमांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ (प्रमेय 8.2)
कोणAB ∥ DC, तिर्यक रेखा BD — एकांतर कोण
भुजादिया है
(5), (6), (7) से, SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(iv)
कथनकारण
CPCT (A ↔ C, Q ↔ P)
(v) APCQ एक समांतर चतुर्भुज है
(5) प्रमेय 8.3: यदि एक चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म बराबर हो, तो वह एक समांतर चतुर्भुज होता है।
चतुर्भुज APCQ में,
कथनकारण
(4) से — सम्मुख भुजाओं का पहला युग्म
(8) से — सम्मुख भुजाओं का दूसरा युग्म
प्रमेय 8.3 से, APCQ एक समांतर चतुर्भुज है
उत्तर:
(i) (SAS)
(ii)
(iii) (SAS)
(iv)
(v) APCQ एक समांतर चतुर्भुज है — सभी सिद्ध हुए।
प्रश्न 6

ABCD एक समांतर चतुर्भुज है तथा AP और CQ शीर्षों A और C से विकर्ण BD पर क्रमशः लम्ब हैं (देखिए आकृति 8.13)। दर्शाइए कि(i) (ii)

ज्ञात है
ABCD एक समांतर चतुर्भुज है
और
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
(i)
(ii)
ABCDPQ
आकृति 8.13
ABCDPQ
हल की आकृति: समकोण बैंगनी, एकांतर कोण नीले, AB = CD लाल
∠APB = ∠CQD = 90°∠ABP = ∠CDQAB = CDAP, CQ
(i)
(1) एकांतर अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
(2) प्रमेय 8.2: एक समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
(3) AAS सर्वांगसमता नियम: दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि इन त्रिभुजों के दो कोणों के युग्म बराबर हों और संगत भुजाओं का एक युग्म बराबर हो।
और में,
कथनकारण
कोणदोनों 90° हैं (AP ⊥ BD, CQ ⊥ BD)
कोणAB ∥ DC, तिर्यक रेखा BD — एकांतर कोण
भुजासमांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ (प्रमेय 8.2)
(1), (2), (3) से, AAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
AAS में भुजा संगत होनी चाहिए: समकोण के सामने है और समकोण के सामने है ✔
(ii)
(4) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (A ↔ C, P ↔ Q)
उत्तर:
(i) (AAS)
(ii) — दोनों सिद्ध हुए।
प्रश्न 7

ABCD एक समलंब है, जिसमें और है (देखिए आकृति 8.14)। दर्शाइए कि(i) (ii) (iii) (iv) विकर्ण विकर्ण है। [संकेत: AB को बढ़ाइए और C से होकर DA के समांतर एक रेखा खींचिए जो बढ़ी हुई भुजा AB को E पर प्रतिच्छेद करे।]

ज्ञात है
ABCD एक समलंब है:

रचना: AB को E तक बढ़ाया और खींची
ज्ञात करना है
सिद्ध करना है:
(i)
(ii)
(iii)
(iv) विकर्ण विकर्ण
ABCDE
आकृति 8.14
ABCDE
हल की आकृति: AD = BC = CE लाल, △BCE के बराबर कोण नारंगी, ∠A = ∠B नीले, ∠C = ∠D हरे-नीले
AD = BC = CE∠CBE = ∠CEB∠A, ∠B∠C, ∠DAB ∥ DCDA ∥ CE
(i)
(1) समांतर चतुर्भुज: वह चतुर्भुज जिसकी सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हों, समांतर चतुर्भुज कहलाता है।

चतुर्भुज ADCE में (AB ∥ DC और E, AB की बढ़ी हुई रेखा पर है) और (रचना से)। अतः ADCE एक समांतर चतुर्भुज है।

(2) प्रमेय 8.2: एक समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
(समांतर चतुर्भुज ADCE की सम्मुख भुजाएँ)
(दिया है)((1) से)
(3) प्रमेय 7.2: एक समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
में,
कथनकारण
BC = CE (2); CB के सामने ∠CEB, CE के सामने ∠CBE
(4) तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता है (योग )।
(AD ∥ EC, तिर्यक रेखा AE — एक ही ओर के अंतः कोण)
(5) रैखिक युग्म अभिगृहीत (अभिगृहीत 6.1): यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग होता है।
(किरण BC रेखा AE पर खड़ी है (रैखिक युग्म))
((4) और (5) से — दोनों 180° के बराबर)
((3) से ∠CEB = ∠CBE रखने पर)
(+∠CBE को पक्षांतर करने पर −∠CBE हो जाता है)(∠CBE − ∠CBE = 0)

अतः ।

(ii)
(AB ∥ DC, तिर्यक रेखा AD — एक ही ओर के अंतः कोण)
(AB ∥ DC, तिर्यक रेखा BC — एक ही ओर के अंतः कोण)
((6) और (7) से — दोनों 180° के बराबर)
((i) से ∠A = ∠B रखने पर)
(+∠B को पक्षांतर करने पर −∠B हो जाता है)(∠B − ∠B = 0)
(iii)
(6) अभिगृहीत 7.1 (SAS सर्वांगसमता नियम): दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।
और में,
कथनकारण
भुजादिया है
कोण(i) से (∠B = ∠A)
भुजाउभयनिष्ठ भुजा
SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा
संगत शीर्ष: , ,
(iv) विकर्ण विकर्ण
(7) CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग): दो त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग (संगत भुजाएँ और संगत कोण) बराबर होते हैं।
कथनकारण
CPCT (A ↔ B, C ↔ D, इसलिए AC ↔ BD)
उत्तर:
(i)
(ii)
(iii) (SAS)
(iv) विकर्ण विकर्ण — सभी सिद्ध हुए।
← प्रश्नावली 7.3प्रश्नावली 8.2 →

यह हल MP Board (MPBSE) कक्षा 9 गणित की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 8 ‘चतुर्भुज’ के अनुसार है।